उन दिनों कुछ नाम बाकियो से ज्यादा चर्चित हुआ करते थे
जो सबसे लम्बा था उसका नाम ही आशु था
जो आज चलते हुए भी कभी कभी हॉफ जाता है
वो हम सब लोगो में सबसे तेज़ दौड़ा करता था
स्कूल के दिनों की कोई बात जब किसी को सुनाता हूँ
इन ही लोगो को अपने आस पास पाता हूँ
जिसने टेंथ में हिंदी में टॉप किया था
उसकी मातृभाषा ही बांग्ला थी
और जिसकी हैंडराइटिंग सबसे ज्यादा बुरी थी
उसी ने एस ऍम एस कॉलेज से डॉक्टरी की
स्कूल के दिनों की यह बात जब किसी को बताता हूँ
तब इन ही लोगो का नाम ले कर इतराता हूँ
जो एक पुरानी सी साइकिल पे स्कूल आया करता था
वह अब अपनी बाइक से हर महीने हिमालय के चक्कर काट कर आता है
तब जिस लड़के का वजन इतना था की उसे फूँक मार के उड़ा दिया करते थे
आज उसकी सिक्स पैक abs की पिक FB पे लाइक मारते है
अपने स्कूल के दिनों की ये बातें जब लोगो को बताता हूँ
इन्ही बातों से उनको हंसाता हूँ
ज्यादातर लोगो के स्कूल का प्यार फेयरवेल से आगे नहीं पंहुचा
लेकिन कुछ थे जो अपनी तकदीर खुदा से लिखवा के लाये थे
कोई कोई ऐसा भी था जिसकी प्रेम कहानी स्कूल के हर क्लास में दर्ज थी
और कोई ऐसा भी था जिसका नाम तक लोगो को याद नहीं आज
अपने स्कूल के दिनों की ये बातें जब लोगो को बताता हूँ
इन्ही बातों से अपनी आखें भींगा जाता हूँ
जिसने हिस्ट्री की क्लास में टीचर से सात थप्पड़ खाये है
उसने अपना खुद का बिज़नेस करके पैसे खूब कमाए है
तबके सभी बैक बेंचेर आज मैनेजर बन चुके है
तब अपना होम वर्क नहीं कर पाते थे,
और आज पूरी टीम से करवाते है
अपने स्कूल के दिनों की ये बातें जब लोगो को बताता हूँ
वो लोग ऐसे थे, यकीन नहीं कर पाता हूँ
प्रिंसिपल की दकियानूसी बातों पर, हम उनके मुँह पर ही हंस देते थे
एक्स्ट्रा क्लास लगवा कर, हमे असेंबली से ही अलग करवा दिया गया था
हफ्ते में आने वाले एक मात्र गेमस पीरियड की टीम एक दिन पहले ही बट जाय करती थी
मैदान में हम वक़्त से पहले होते थे, लेकिन वापिस आते आते अगला पीरियड भी खत्म हो जाता था
अपने स्कूल के ये किस्से जब लोगो को बताता हूँ
उन्हें भी अपने साथ मुस्कुराता हुआ पाता हूँ
साइंस और कॉमर्स ले कर भी जो कभी बट गए थे
आज वो फर्क व्हाट्स अप्प के ग्रुप में नज़र नहीं आता
जो कभी जिगरी दोस्त हुआ करते थे, वो दोस्त तो अब भी है मगर
उनका जिगर अब सिर्फ अपने शरीर का खून साफ़ करने के काम आता है
वो पूछते है फिर मुझसे, क्या यही तुम्हारी हिस्ट्री है तो मैं कोई जवाब नहीं दे पाता,
बस ये सोचता हूँ की हिस्ट्री तो तारीखों की मोहताज़ होती है
ये हमारी लाइफ का वो हिस्सा है जो अब किस्सों में सिमट गया है,
ये हिस्सा तब तक ही है ,जब तक वह लोग है और एक दूसरे को याद है
जिन दिनों की याद करते ही चहरे पे मुस्कान आ जाये
वोही याद करके मै फिर किसी और टॉपिक पे आ जाता हूँ