वो स्कूल की लड़की
जब दोस्तों से मिलने, सालो बाद वापिस आई
वहाँ उस भीड़ में, कुछ जाने पहचाने लेकिन बदल चुके चेहरे दिखाई दिए
वो वही स्कूल के लड़के थे, लेकिन अब सब आदमी हो गए थे
वो उनके नाम और चेहरों का, अपनी यादों से मिलान करने की कोशिश कर रही थी
ये वही हैं या कोई और! इस भ्रम में किसी को भी मिलने से कतरा रही थी
ये लोग मुझे पहचान तो लेंगे ना, यही सोच कर एक कोने की कुर्सी पकड़ कर बैठ गई
जो सालों से किसी से टच में नहीं हो, उसके लिए किसी ग्रुप का हिस्सा बनना आसान कहाँ
जब उन खिल-खिलाते हुए चेहरों को देखा, तो याद आया की वो भी कभी वहीं पाई जाती थी
वो स्कूल की लड़की,
थोड़ी देर के लिए वहीं पहुँच गई
तब उसका भी एक छोटा स झुण्ड हुआ करता था
बस उन दो तीन लोगों का, बाकी सब से कोई बात हो ऐसा जरूरी नहीं था
लेकिन कुछ बातें थी जो सब में कॉमन थी
वो चित्रा आईययर का डर हो, या प्रिन्सपल का दकियानूसीपन
श्रीवास्तव के वाहियात इग्ज़ैम्पल हो, या बोर्ड इग्ज़ैम का प्रेशर
सभी लोग इन सभी बरबर्ताओ से हो कर गुजरे थे
कुछ तो आज भी इन्हे सपने में देख कर डर कर उठ जाते हैं
सही हैं, की साथ में झेली गई सजा हो, या मज़ा हो
लोगों को आपस में जोड़ ही देता हैं
उस समय सीधे बात सभी से हो ना हो, मगर गप्पों में सबके जिक्र हुआ करते थे
तब कोई खास दुआ सलाम नहीं थी, ना स्कूल के बाद ही कभी हुई
कभी रास्ते चलते चलते भी स्कूल वाला कोई दिखा नहीं
दिखा भी तो, आ कर मिला नहीं
ये वही स्कूल की लड़की थी
जो एक दिन स्कूल कि असेंबली में, उस से टकरा गई थी
जिसे वो फिर कभी भुला नहीं पायी
बोर्ड के एग्जाम के बाद, मिलने का वादा किए बिना ही रुखसत हो गई थी
कभी मिलूँगी इन लोगों से वापिस, ऐसा इरादा तो कभी किया नहीं था उसने
फिर भी आज किसी पुराने दोस्त के बहुत बुलाने पर
पहुँच ही गई- इस ज़माने से - उस ज़माने में
मैं क्यू ही यहाँ या गई, जिसने मुझे यह आने के लिए फोर्स किया
उस पर मन ही मन थोड़ा गुर्रा गई
इससे पहले कोई मुझे रोके, चलो निकल लेते हैं
ना मुझे इनकी परवाह ना इन्हे कोई फिकर
कयूं फालतू में समय को फालतू करे, कोई मिलने तो नहीं आया अभी तक,
अगर चली जाऊँगी तो किसी को पता भी नहीं चलेगा
वो उठी ही थी, की वो उससे टकरा गई
जिससे कभी ना मिलने की कसम खाई थी
वो कसम तो उसे याद थी, पर वजह भूल गई थी
उसके सामने,
वोही स्कूल की लड़की खड़ी थी
जिसे वो पीछे छोड़ आई थी
‘कहाँ भाग रही हैं?’ उसने तपाक से पूछा
अरे नहीं मैं तो यहाँ आ ही नहीं रही थी
कुछ वजहे हैं जिसे वो गिना रही थी
लेकिन वो स्कूल की लड़की उसे देख कर मुस्कुरा रही थी
‘अच्छा वजह-वजह बाद में खेलते हैं, चल पहले चल कर थोड़ी यादें टटोलते हैं’
उसकी रजामंदी के पहले ही वो उसे उस ग्रुप में ले गई
‘देखो देखो कौन आया हैं’
‘Is it really you!’ कोई देख कर चौका
‘तू तो गायब हो गई थी, एक दम Mr India टाइप’
वो अब भी सहज नहीं हुई थी,
आ तो गई थी वहाँ, लेकिन थी वो अभी भी अपनी वजहों के साथ
तभी एक लड़का, मेरा मतलब आदमी बोल पड़ा
अगर उस दिन तूने मुझे अपनी answer शीट नहीं दिखाई होती, तो Singh Mam ने मुझे फेल ही कर दिया था
‘ना मैं पास होता, ना मेरी शादी होती, ना मैं विदेश जाता’
‘और ना तू हमको इतना जलता’ वो स्कूल की लड़की बोल पड़ी
‘अरे हाँ, क्यू ही तूने इसको पास होने दिया। पता हैं हमेशा अपने Status में अपने को बड़ा आदमी दिखाता हैं, और आज छोटा बन रहा हैं’
वो अब भी उस आदमी, मेरा मतलब लड़के, का नाम याद करने की कोशिश कर रही थी
शायद वो तो उसे भूल गई थी
लेकिन वो उसे आज भी याद करता था
सच कभी अपनी याद ही काफी नहीं होती खुद को जानने के लिए
किसी और की याद में तुम कैसे थे
ये भी याद आ जाता हैं

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