अभी कुछ दिनों से मुझे अचरज होना बंद हो गया है
थोड़े समय पहले जो उत्साहित करता था, वो अब नीरस सा लगता है
मोबाइल पे थिरकती उंगलिया किसी अनजान उत्सुकता की तलाश करती है
लेकिन इस सवा छह इंच के दायरे के बहार अपने आप को ढूंढने की कोशिश में लगा हूँ
अभी कुछ दिनों से बादलो में आकृतिया दिखना भी बंद हो गयी है
यह किसी कमीज पे लगे काले ढब्बो से बढ़कर और कुछ नहीं लगते
शायद मेरा अवचेतन मन भी मुझसे उक्ता गया है, उसे बुनने के लिए आजकल सपने नहीं मिल रहे
लेकिन इस खालीपन के आगे आपने व्यक्तित्य को परिभाषित करने की कोशिश में लगा हूँ
अभी कुछ दिनों से किसी खेल में भी मन नहीं लगता
यह भी बाग़ में लगे उस झूले की तरह है जिसे बच्चो ने कबका भुला दिया है
देखते ही देखते असली मैदान की जगह कृत्रिम भूमि के चलचित्रो ने लेली
लेकिन इस अवास्तविकता में अपनी वास्तविकता को बचाये रखने की कोशिश में लगा हूँ
पर अभी कुछ दिनों पहले इस मझदार के बहार का रास्ता खोज लिया है
यह वह सरम मोबाइल सन्देश है जो मैंने अपने ही मन में सहेज लिया है
अक्सर उबाऊ, सामान्य और निरुत्साह ये जीवन हुआ है
लेकिन इसी को सवारने की कोशिश करते करते करते ये जीवन जीना है