Tuesday, 19 August 2025

नहीं

 

नहीं, नज़र कभी न मिली हमारी,
मगर मैंने देखा है,
तुम्हें यह देखते हुए—
कि क्या मैं भी तुम्हें देख रहा हूँ?

 

कोई बात न की तुमने,
मगर मैंने सुना है,
तुम्हें चुपचाप सुनते हुए—
कि क्या मैं तुम्हें कुछ सुनाना चाहता हूँ?

 

मेरा ना होना शायद तुमने न महसूस किया,
मगर मैंने महसूस किया है,

तुम्हें महसूस करते हुए—
कि क्या मुझे तुम्हारे होने का एहसास है?

 

मुझे नहीं मालूम,
मेरे बारे में तुमने कभी सोचा है?
मगर मैंने सोचा हैं, तुम्हें ये सोचते हुए—
कि क्या तुम मेरे सोचे जाने के बारे में सोच रही हो?

 

नहीं, अब तक आवाज़ नहीं लगाई तुमने,
पर पूरी खामोशी में
मैंने तुम्हें रियाज़ करते पाया है,
एक दिन मेरा नाम पुकारने का।

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