वो मेरे स्कूल का लड़का था
बात ज्यादा नहीं करता था, लेकिन बोलता बहुत था
इतने दोस्त नहीं थे उसके
बस दो चार के साथ ही फ़िरता था
उसके नंबर बहुत ज्यादा नहीं आते थे
कभी कम पड़ जाए, यूं भी नहीं होता था
लेकिन टीचरों का प्रकोप उस पर बार बार पड़ता था
बेचारा नहीं था वो, बस शरारते छुपा नहीं पाता था
वो मेरी ही स्कूल का लड़का था
उसका नाम Guiness Book में आए
आज तक ऐसा कोई कारनामा नहीं किया उसने
लेकिन स्कूल के आखिरी दिनों में मेरी Slam Book जरूर भरी थी
क्या क्या था उसमे वो याद कर के आज भी हंसी आती हैं
फोन नंबर वाले कॉलम में लिखा था
‘जिस दिन खरीद लूँगा उस दिन दे दूंगा’
Address वाले में कहा – ‘लापता का क्या पता’
क्या बनना चाहते हो? वाले कॉलम में भरा
‘अच्छी तरह से बना हुआ हूँ, और कितना बनूँगा’
और अंत में your latest Crush
उसमे लिखा ‘Mango Crush’
सचमुच इतना भोला था या बस बनता था
कोई तो पसंद रही होगी उसे
इस मामले में बड़ा Secretive था
वो उसी स्कूल का लड़का था
जहाँ सालो पहले, हम मिलने के बाद बिछड़ गए थे
सोचती हूँ क्या अब भी वैसा ही होगा?
एक दिन facebook से पता चला की उसकी शादी हो चुकी हैं
हमे तो बुलाया नहीं,
क्या इतनी महंगाई हो गई हैं
मिलेगा तब बताऊँगी उसे
अच्छी तरह से सुनाऊँगी उसे
कभी कोई खबर नहीं
मेसेजेस का कोई असर नहीं
उस दिन जब स्कूल छोड़े पच्चीस साल हो गए
किसी के कहने पर सब इकठ्ठा हो गए
उसमे वो भी आया था
मेरी स्कूल का वोही लड़का
कुछ तो बदल गया था उसमे
वो उसके बाल थे आँखें थी या Skin
ठीक से कह नहीं सकती
उसकी आवाज में से मसखरापन गायब था
टूटी फूटी अंग्रेजी बोलने वाला वो लड़का
बड़ी सफिस्टिकैटड जुबान में जवाब दे रहा था
कभी क्लास के बाहर कान पकड़ कर खड़े रहने वाला वो
आज सूट बूट में अपनी Personality चमका रहा था
जब सामने आया तो मैं पूछ पड़ी
‘क्यू! स्कूल के बाद कैसी कटी’
थोड़ी देर शांत रहने के बाद
बोल पड़ा, वोही स्कूल का लड़का
‘पहले पहल थोड़ा मासूम था, फिर थोड़ा सयाना हुआ
शुरू में लगा की दोस्तों के बिना कैसे रहूँगा
कभी किसी चक्कर में फस गया, तो किससे कहूँगा
फिर समझा की जीवन पहले दोस्तों की आदत दिलाता हैं
और फिर उन्ही दोस्तों को तुमसे दूर कराता हैं
हम भी फिर उस्ताद बन जाते हैं
जिनके साथ की सबसे ज्यादा दरकार हो
उनके बगैर ही जीने लग जाते हैं’
बहुत सोचने लगा था, वो कम बोलने वाला लड़का
मैंने उसे रोका, और फिर पूछा
की 'कैसे किया जीवन का सामना
जब मुश्किले आई, कोई था क्या तुझे थामने वाला
उस लड़की का क्या हुआ, जिसे तू पसंद करता था
घरवाले नहीं माने, या वो?
वो स्कूल का लड़का थोड़ा Confuse हो गया
बोला ‘वो उम्र गई जब ये सवाल पूछे जाते थे
यहाँ तो सभी यही जानना चाहते हैं की
तू करता क्या हैं,
किस पोस्ट पर है,
कितने घर हैं,
कितने बच्चे’
मैंने भी कहाँ
तेरे Status से नहीं, मैं तुझसे मिलने आईं हूँ
25 सालों से तेरी कहानियाँ नहीं सुनी
मैं आज पकने आई हूँ
तू तेरी तरक्कीयाँ भी गिना लेना, मैं तेरी खामियाँ याद करा दूँगी
और कोई कमी रह गई, तो बाकियों को भी बुला लूँगी
उसकी बचपन वाली मुस्कान लौट आई थी
बड़ा हो गया था वो
लेकिन इतना नहीं की अपनी शरारते भूल गया हो
‘तुझे याद हैं जिस दिन हमने क्लास का स्विच बोर्ड तोड़ा था?’
‘वो तू था!’, मैंने पूछा
और वो हंसने लगा,
वोही बहुत कम बात करने वाला लड़का
जो मेरी स्कूल में पढ़ता था
आज वहीं, उसी जगह
वो सारी पुरानी कहानियाँ सुना रहा था
जिन्हे भूले हुए सालों बीत गए थे





