Saturday, 30 August 2025

काफी कमाल के व्यक्ति हो

जब तक जीवन में कुछ पा नहीं लेते
ताने और गाली दोनों को अपना लेते हो

हर ताने का जवाब नहीं देना आता तुमको
मुस्कान की छाया में सबकुछ छुपा लेते हो

दूसरों को देख कर कभी सीख लेते हो चलना
और कभी कोई पहाड़ अपने आप ही उठा लेते हो

सच! काफी कमाल के व्यक्ति हो

कभी तेज धूप तुमको तपा भी नहीं पाती
और कभी छाया को भी अंधकार कह कर,
लंबी तान को सो जाते हो

अक्सर शाम को आलस्य और परिश्रम का मिश्रण,
अपनी भावना में डाल कर पी जाते हो
वाकई बड़े कमाल के व्यक्ति हो

सत्य सिर्फ जिताता या हराता नहीं हैं, ये डराता भी हैं 
जब दो सत्य आपस में टकरा जाते हैं
दूसरे वाले सच को भी थोड़ा सा अपना लेते हो
हम्म, इस
मुस्कान की आभा में तुम
काफी कुछ छुपा लेते हो

जीवन से रिश्ता कभी नहीं टूटा तुम्हारा
जबकि इसने तुम्हें जीतने से ज्यादा हराया हैं
जिस आईने को देखने से घबराता हैं औरों का दिल
उसी में अपना प्रतिबिंब देख कर,
अपनी कंघी से मांग बना लेते हो

वाकई काफी कमाल के व्यक्ति हो

सेल्फ़ी खींचने वाली सेल्फिश दुनिया
तुम्हें आगे बढ़ता देख नहीं पाती
जब कभी जीवन में कुछ पा लेते हो
कुछ लोगों को अनचाहे ही जला देते हो
तब छोड़ देते हैं लोग तुम्हारी ही महफ़िल में तुमको अकेला
बस किसी दर्द में डूबे को अपना दोस्त बना लेते हो

तुम बिना किसी को पीछे छोड़े
आगे बढ़ते ही जाते हो

तुम सह लेने का गुण जानते हो
अपने आप में काफी कमाल व्यक्ति हो

Tuesday, 19 August 2025

नहीं

 

नहीं, नज़र कभी न मिली हमारी,
मगर मैंने देखा है,
तुम्हें यह देखते हुए—
कि क्या मैं भी तुम्हें देख रहा हूँ?

 

कोई बात न की तुमने,
मगर मैंने सुना है,
तुम्हें चुपचाप सुनते हुए—
कि क्या मैं तुम्हें कुछ सुनाना चाहता हूँ?

 

मेरा ना होना शायद तुमने न महसूस किया,
मगर मैंने महसूस किया है,

तुम्हें महसूस करते हुए—
कि क्या मुझे तुम्हारे होने का एहसास है?

 

मुझे नहीं मालूम,
मेरे बारे में तुमने कभी सोचा है?
मगर मैंने सोचा हैं, तुम्हें ये सोचते हुए—
कि क्या तुम मेरे सोचे जाने के बारे में सोच रही हो?

 

नहीं, अब तक आवाज़ नहीं लगाई तुमने,
पर पूरी खामोशी में
मैंने तुम्हें रियाज़ करते पाया है,
एक दिन मेरा नाम पुकारने का।

Monday, 11 March 2024

कौन सी कविता लिखूँ

कौन सी कविता लिखूँ

वही जो तुम्हारे मिलने के ठीक पहले लिख रहा था
या वो जो तुम्हारे आ जाने के बाद लिखना भूल गया था


उसका क्या करू जिसे बस
लिखते - लिखते छोड़ दिया था

और वो जो मन में आई तो थी
पर जब कलम ले कर बैठा तब तक विलुप्त हो गयी थी

और वो वाली जो रात को दस्तक देने आई थी
लेकिन जबतक उसे सुन पाता
, वो जा चुकी थी

एक कविता ऐसी भी थी जो सुबह-सुबह सपने की तरह दिखी
पर आँख खुलते तक भूल गयी

याद हैं उसे कितनी देर तक याद किया था

इन सब अधूरी कविताओ को कभी पूरा नहीं किया
लेकिन तुम्हारे आने के बाद इनकी कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी

Monday, 20 March 2023

जानो या, ना जानो

 "जानना क्या होता है ?"

बिना किसी मुस्कान के उस मुस्कुराते हुए चहरे ने पुछा

"क्या? "मैंने कहा 

"यही की ये जानना आखिर होता क्या है "

सवाल सीधा था और उत्तर मेरे पास था

"जानना मतलब अनजान नहीं रहना" टपक से मेरा जवाब आया 

लेकिन संतुष्टि उसके चेहरे से नदारद थी, शायद उस मुस्कान की तरह 

"फिर खुद को जानना क्या होता है ?"

"खुद को ?" मैंने पुछा 

"हाँ मतलब ऐसा क्यों कहते है की खुद जो जानो"

"क्युकी,,," मैं सोच में पड़ गया 

"अपने बारे में सबसे पहले क्या जानना चाहिए"

हम्म, मेरे सोचने की शक्ति विलुप्त हो रही थी

"क्या पहले खामियाँ पहचाने या पहले खूबियों को टटोले ?"

ये तो पहेली हो गयी 

"या अपने स्वभाव का चित्र बनाये"

चित्र!, स्वभाव का चित्र ?

"लेकिन फिर सोचा की अपना चित्र कौन बनता है"

ये बात तो है, लेकिन 

"और इच्छाओ का क्या, क्या वो ही मुझको मैं नहीं बनाती?"

"सच पर और भी तो बहुत कुछ है जानने को" मैं बोल पड़ा 

"क्या"

"यही की पहले ये जानो की ,,, " सचमुच विलुप्त नहीं तो विलुप्ति की कगार पे तो आ ही गयी है मेरी सोच 

"पहले ये जानो की क्या जानना है फिर ये की कैसे जानना है, और फिर ये की यह सब जान की क्या करोगे!"

क्या मैं यह सब जान भूझ कर कर रहा हूँ?

"अच्छा मेरा काम पूरा हुआ, अब तुम,,,"

"अब मैं क्या " मैंने उस मुस्कुराते हुए चेहरे को देखा 

"अब तुम जानो!"

 

image credit: Mark Timberlake 

Wednesday, 1 December 2021

इस कविता का शीर्षक नहीं मिला

 


गली के मोड़ पर उसने उसको आखिरी बार देखा था 

खुद को वही छोड़ कर वह आगे बढ़ गया 

बहुत पहले उसने समझ लिया था, 

की सब को समझना उसकी समझ से परे हैं 


सब में वह खुद भी आता था 


उससे मिलने जब वह उसके शहर आया था 

आशा ऐसी थी की खुद से भी मुलकात हो जाएगी, 

बहुत पहले उसने समझ लिया था 

की अपनों को क्षमा करना कितना कठिन होता है 


क्षमादान वह खुद को भी नहीं दे पाया था 


समय से पहले पहुंचना उसका व्यक्तित्व नहीं था  

पर देर होने का डर उसके मिज़ाज़ पे हावी था 

बहुत पहले उसने समझ लिया था 

की ठंडी कॉफ़ी पीना अब उसकी आदत बन चुकी हैं 


और अपनी आदतों से वह खुद भी ऊब चूका हैं 


मुलाकात के अंत में दोनों उसी गली के कोने पर विदा हुए  

उसके जाने के बाद उसने अपने लौट आने की प्रतीक्षा की 

बहुत पहले उसने समझ लिया था, 

की खुद को पुकारने के लिए उसे किसी अनुवादक की ज़रुरत नहीं 


शायद खुद को मनाने के लिए, वह फिर एक बार इस मोड़ पर आए

Monday, 11 October 2021

मेरी तारीफ करना भूल जाती हो



वर्क फ्रॉम होम करते करते मेरा मन तो घर में ही लग गया है

तुम्हारे दफ्तर वालो ने मगर तुमको ऑफिस में ही बुलाया हैं

जो पहले तुम घर होती थी, आज कल मैं होता हूँ

तुम ग्रहणी थी और अब मैं ग्रहण हो गया हूँ 


लेकिन जब तुम आने को होती हो तब ये सोचता हूँ 

थक कर जब तुम घर आओ ,और फिर किचन के काम में लगना न पड़े  


जब मैं तुम्हारे घर आने से पहले सारे बर्तन धो डालता हूँ

और पतीले में चाय बना कर त्यार रखता हूँ

तुम चुपचाप चाय का कप उठाती हो 

अपना मोबाइल चेक करते करते उसे ख़तम कर देती हो  


फिर तुम अपना काम करने लग जाती हो  

और मेरी तारीफ करना भूल जाती हो 


जब कभी मैं तुम्हारे लिए पनीर बनता हूँ

तुम्हारे हिसाब से उसमे सारे मसाले मिलाता हूँ 

हम कोई थ्रिलर मूवी देखते हुए उसे खाते है 

उसके बाद बस सोने चले जाते है 


रात को जब तुम सो रही होती हो 

मुझे याद आता है तुम पनीर की तारीफ करना भूल गयी हो 


सुबह सुबह कभी कभी जब मैं तुमसे पहले उठ जाता हूँ

और जैसे तैसे नाश्ता बना कर तुम्हारे लिए बेड पर लाता हूँ

तुम अपना व्हाट्स अप्प मेसेजस देखते हुए नाश्ता पूरा करती हो 

और फिर अपनी दिन चर्या में लग जाती हो


तुम्हारे जाने के बाद मैं जब अपना नाश्ता करता हूँ 

सोचता हूँ अगली बार तुम्हे मेरी तारीफ करना याद दिलाता हूँ  


लेकिन उस दिन जब मैं तुम्हे याद दिलाने तुम्हारे पीछे आया 

तो देखा की किचन की सफाई में लगी हो 

चाय का पतीला हो या पनीर की कढ़ाई

तुम्ही उन्हें साफ़ करके ठीक जगह पर रख रही हो 


उस दिन लगा की तारीफ की भूख में जो भी किया 

उसने शायद तुम्हारा काम ही बढ़ा दिया 


तुम अगले दिन फिर दफ्तर जाती हो

मेरे लिया दिन का खाना और अपने लिए टिफ़िन बनाती हो 

तुम्हारे जाने के बाद जब मैं किचन देखता हूँ

मेरे लिए कोई काम छोड़ा हैं, ऐसा नहीं पाता हूँ


सही हैं, मेरी तारीफ के लिए तुम्हारे पास शब्द नहीं हैं 

लेकिन मेरी तारीफ हो इसके लिए अभी सही वक़्त नहीं हैं 


Photo taylor hernandez

Wednesday, 26 May 2021

वो दिन दुबारा नहीं आये

 


फेसबुक पर आज  जब उसकी तस्वीर देखी, तो समझ आया की वो कितना बदल गया है

उसकी फटी पुरानी जीन्स की जगह एक चमकते हुए सूट ने ली हुई थी   

प्रोफाइल पिक में एक घर, कार और दुनिया भर के गंतव्य स्थानों में ली गयी उसकी सेल्फीयां थी 

कभी भुखमरी से सिकुडा हुआ चेहरा आज सफलता की चर्बी से दब सा गया है   


सच, हम वो नहीं रहते, कुछ और बन जाते है 

पर दोस्त तू कितना भी बदल जाये, मुझे आज भी तेरी वही शकल याद है 

जो तू टपरी पे चाय पीने के बाद, पांच रूपये सिगरेट के लिए उधार मांगते वक़्त बनाया करता था 

या एग्जाम में फर्रा गुम जाने पर, मेरी आंसर शीट की झलक दिखाने के लिए 


मेरी बहुत सी भाभियो में से किसी को घुमाने के लिए मेरी बाइक  की चाभी मांगते वक़्त 

सच, कुछ तो है, जिसे बदलना मुमकिन नहीं 


मुझे याद है जब तू पहली पहली बार कॉलेज आया था, 

काम क्रोध मोह और अहंकार, सब बराबर मात्रा में कही से भरवाया था 

विपरीत लैंगिक जीवो की तरफ आकर्षण तो था ही, मद्यपान की वस्तुवो के प्रति समर्पण भी 

सीधा सादा बनाने के सारे जतन तू स्कूल में ही छोड़ आया था 


सच, ये दुनिये किसी को हमेशा बच्चा नहीं रहने देती 

किताबो की जटिलताएं और वाइवा की विफलताए, दोनों तुझे बंक मारने से नहीं रोक पायी 

नयी यंग टीचर की अदाए या अटेंडेंस की सीमाएं, दोनों तुझे लेक्चर हॉल की तरफ कभी नहीं खींच पायी 

मुझे याद है की किसी टेस्ट से पहले तू ये भी पूछ लिया करता था की एग्जाम कोनसा है 


और आज तू अपने फील्ड का सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट कहलाता है 

सच हम वो नहीं रह पाते, कुछ और बनना पड़ता है 



कुछ साल पहले सबने फिरसे मिलने का प्लान बनाया था  

तूने भी आगे बढ़कर अपना निर्णय सुनाया था   

पर सभी लोग अपनी अपनी व्यस्तताओं के चलते नहीं आ पाए 

'अगली बार पक्का' का वादा एक दूसरे को दे आये 


सच, वक़्त तो शायद लौट कर आ जाता है, पर कभी कभी लोग वक़्त पर नहीं आ पाते 


 

काफी कमाल के व्यक्ति हो

जब तक जीवन में कुछ पा नहीं लेते ताने और गाली दोनों को अपना लेते हो हर ताने का जवाब नहीं देना आता तुमको मुस्कान की छाया में सबकुछ छुपा लेत...