Thursday, 4 June 2026

वो मेरे स्कूल का लड़का था


वो मेरे स्कूल का लड़का था 

बात ज्यादा नहीं करता था, लेकिन बोलता बहुत था 

इतने दोस्त नहीं थे उसके 

बस दो चार के साथ ही फ़िरता था 


उसके नंबर बहुत ज्यादा नहीं आते थे 

कभी कम पड़ जाए, यूं भी नहीं होता था 

लेकिन टीचरों का प्रकोप उस पर बार बार पड़ता था

बेचारा नहीं था वो, बस शरारते छुपा नहीं पाता था 


वो मेरी ही स्कूल का लड़का था 

उसका नाम Guiness Book में आए 

आज तक ऐसा कोई कारनामा नहीं किया उसने 

लेकिन स्कूल के आखिरी दिनों में मेरी Slam Book जरूर भरी थी  


क्या क्या था उसमे वो याद कर के आज भी हंसी आती हैं 

फोन नंबर वाले कॉलम में लिखा था 

‘जिस दिन खरीद लूँगा उस दिन दे दूंगा’ 

Address वाले में कहा – ‘लापता का क्या पता’ 


क्या बनना चाहते हो? वाले कॉलम में भरा 

‘अच्छी तरह से बना हुआ हूँ, और कितना बनूँगा’ 

और अंत में your latest Crush 

उसमे लिखा ‘Mango Crush’ 


सचमुच इतना भोला था या बस बनता था 

कोई तो पसंद रही होगी उसे 

इस मामले में बड़ा Secretive था 


वो उसी स्कूल का लड़का था 

जहाँ सालो पहले, हम मिलने के बाद  बिछड़ गए थे 


सोचती हूँ क्या अब भी वैसा ही होगा?

एक दिन facebook से पता चला की उसकी शादी हो चुकी  हैं 

हमे तो बुलाया नहीं, 

क्या इतनी महंगाई हो गई  हैं 


मिलेगा तब बताऊँगी उसे 

अच्छी तरह से सुनाऊँगी उसे 

कभी कोई खबर नहीं 

मेसेजेस का कोई असर नहीं 


उस दिन जब स्कूल छोड़े पच्चीस साल हो गए 

किसी के कहने पर सब इकठ्ठा हो गए 

उसमे वो भी आया था 

मेरी स्कूल का वोही लड़का  


कुछ तो बदल गया था उसमे 

वो उसके बाल थे आँखें थी या Skin 

ठीक से कह नहीं सकती 

उसकी आवाज में से मसखरापन गायब था 


टूटी फूटी अंग्रेजी बोलने वाला वो लड़का 

बड़ी सफिस्टिकैटड जुबान में जवाब दे रहा था 

कभी क्लास के बाहर कान पकड़ कर खड़े रहने वाला वो 

आज सूट बूट में अपनी Personality चमका रहा था 


जब सामने आया तो मैं पूछ पड़ी 

‘क्यू! स्कूल के बाद कैसी कटी’

थोड़ी देर शांत रहने के बाद 

बोल पड़ा, वोही स्कूल का लड़का 


‘पहले पहल थोड़ा मासूम था, फिर थोड़ा सयाना हुआ 

शुरू में लगा की दोस्तों के बिना कैसे रहूँगा

कभी किसी चक्कर में फस गया, तो किससे कहूँगा

फिर समझा की जीवन पहले दोस्तों की आदत दिलाता हैं 


और फिर उन्ही दोस्तों को तुमसे दूर कराता हैं 


हम भी फिर उस्ताद बन जाते हैं 

जिनके साथ की सबसे ज्यादा दरकार हो 

उनके बगैर ही जीने लग जाते हैं’

बहुत सोचने लगा था, वो कम बोलने वाला लड़का   


मैंने उसे रोका, और फिर पूछा 

की 'कैसे किया जीवन का सामना 

जब मुश्किले आई, कोई था क्या तुझे थामने वाला 

उस लड़की का क्या हुआ, जिसे तू पसंद करता था 

घरवाले नहीं माने, या वो?


वो स्कूल का लड़का थोड़ा Confuse हो गया 

बोला  ‘वो उम्र गई जब ये सवाल पूछे जाते थे 

यहाँ तो सभी यही जानना चाहते हैं की 

तू करता क्या हैं, 

किस पोस्ट पर है, 

कितने घर हैं, 

कितने बच्चे’ 


मैंने भी कहाँ 

तेरे Status से नहीं, मैं तुझसे मिलने आईं हूँ 

25 सालों से तेरी कहानियाँ नहीं सुनी 

मैं आज पकने आई हूँ 


तू तेरी तरक्कीयाँ भी गिना लेना, मैं तेरी खामियाँ याद करा दूँगी 

और कोई कमी रह गई, तो बाकियों को भी बुला लूँगी 


उसकी बचपन वाली मुस्कान लौट आई थी 

बड़ा हो गया था वो 

लेकिन इतना नहीं की अपनी शरारते भूल गया हो  

‘तुझे याद हैं जिस दिन हमने क्लास का स्विच बोर्ड तोड़ा था?’ 

‘वो तू था!’, मैंने पूछा  

और वो हंसने लगा, 


वोही बहुत कम बात करने वाला लड़का

जो मेरी स्कूल में पढ़ता था 

आज वहीं, उसी जगह 

वो सारी पुरानी कहानियाँ सुना रहा था 

जिन्हे भूले हुए सालों बीत गए थे 


Tuesday, 2 June 2026

वो स्कूल की लड़की


 


वो स्कूल की लड़की 

जब दोस्तों से मिलने, सालो बाद वापिस आई 

वहाँ उस भीड़ में, कुछ जाने पहचाने लेकिन बदल चुके चेहरे दिखाई दिए 


वो वही स्कूल के लड़के थे, लेकिन अब सब आदमी हो गए थे 

वो उनके नाम और चेहरों का, अपनी यादों से मिलान करने की कोशिश कर रही थी 


ये वही हैं या कोई और! इस भ्रम में किसी को भी मिलने से कतरा रही थी 

ये लोग मुझे पहचान तो लेंगे ना, यही सोच कर एक कोने की कुर्सी पकड़ कर बैठ गई 


जो सालों से किसी से टच में नहीं हो, उसके लिए किसी ग्रुप का हिस्सा बनना आसान कहाँ 

जब उन खिल-खिलाते हुए चेहरों को देखा, तो याद आया की वो भी कभी वहीं पाई जाती थी 


वो स्कूल की लड़की, 

थोड़ी देर के लिए वहीं पहुँच गई 


तब उसका भी एक छोटा स झुण्ड हुआ करता था 

बस उन दो तीन लोगों का, बाकी सब से कोई बात हो ऐसा जरूरी नहीं था


लेकिन कुछ बातें थी जो सब में कॉमन थी 


वो चित्रा आईययर का डर हो, या प्रिन्सपल का दकियानूसीपन

श्रीवास्तव के वाहियात इग्ज़ैम्पल हो, या बोर्ड इग्ज़ैम का प्रेशर 


सभी लोग इन सभी बरबर्ताओ से हो कर गुजरे थे 

कुछ तो आज भी इन्हे सपने में देख कर डर कर उठ जाते हैं 


सही हैं, की साथ में झेली गई सजा हो, या मज़ा हो 

लोगों को आपस में जोड़ ही देता हैं 


उस समय सीधे बात सभी से हो ना हो, मगर गप्पों में सबके जिक्र हुआ करते थे 

तब कोई खास दुआ सलाम नहीं थी, ना स्कूल के बाद ही कभी हुई 


कभी रास्ते चलते चलते भी स्कूल वाला कोई दिखा नहीं 

दिखा भी तो, आ कर मिला नहीं  


ये वही स्कूल की लड़की थी 

जो एक दिन स्कूल कि असेंबली में, उस से टकरा गई थी 

जिसे वो फिर कभी भुला नहीं पायी 


बोर्ड के एग्जाम के बाद, मिलने का वादा किए बिना ही रुखसत हो गई थी 

कभी मिलूँगी इन लोगों से वापिस, ऐसा इरादा तो कभी किया नहीं था उसने 


फिर भी आज किसी पुराने दोस्त के बहुत बुलाने पर 

पहुँच ही गई- इस ज़माने से - उस ज़माने में



मैं क्यू ही यहाँ या गई, जिसने मुझे यह आने के लिए फोर्स किया 

उस पर मन ही मन थोड़ा गुर्रा गई 


इससे पहले कोई मुझे रोके, चलो निकल लेते हैं 

ना मुझे इनकी परवाह ना इन्हे कोई फिकर 


कयूं फालतू में समय को फालतू करे, कोई मिलने तो नहीं आया अभी तक, 

अगर चली जाऊँगी तो किसी को पता भी नहीं चलेगा 


वो उठी ही थी, की वो उससे टकरा गई 

जिससे कभी ना मिलने की कसम खाई थी 


वो कसम तो उसे याद थी, पर वजह भूल गई थी 

उसके सामने, 

वोही स्कूल की लड़की खड़ी थी 

जिसे वो पीछे छोड़ आई थी 


‘कहाँ भाग रही हैं?’ उसने तपाक से पूछा 


अरे नहीं मैं तो यहाँ आ ही नहीं रही थी 

कुछ वजहे हैं जिसे वो गिना रही थी 

लेकिन वो स्कूल की लड़की उसे देख कर मुस्कुरा रही थी 

‘अच्छा वजह-वजह बाद में खेलते हैं, चल पहले चल कर थोड़ी यादें टटोलते हैं’


उसकी रजामंदी के पहले ही वो उसे उस ग्रुप में ले गई 

‘देखो देखो कौन आया हैं’


‘Is it really you!’ कोई देख कर चौका 

‘तू तो गायब हो गई थी, एक दम Mr India टाइप’


वो अब भी सहज नहीं हुई थी, 

आ तो गई थी वहाँ, लेकिन थी वो अभी भी अपनी वजहों के साथ 


तभी एक लड़का, मेरा मतलब आदमी बोल पड़ा 

अगर उस दिन तूने मुझे अपनी answer शीट नहीं दिखाई होती, तो Singh Mam ने मुझे फेल ही कर दिया था 

‘ना मैं पास होता, ना मेरी शादी होती, ना मैं विदेश जाता’ 

‘और ना तू हमको इतना जलता’ वो स्कूल की लड़की बोल पड़ी 


‘अरे हाँ, क्यू ही तूने इसको पास होने दिया। पता हैं हमेशा अपने Status में अपने को बड़ा आदमी दिखाता हैं, और आज छोटा बन रहा हैं’


वो अब भी उस आदमी, मेरा मतलब लड़के, का नाम याद करने की कोशिश कर रही थी 

शायद वो तो उसे भूल गई थी 

लेकिन वो उसे आज भी याद करता था 

सच कभी अपनी याद ही काफी नहीं होती खुद को जानने के लिए 

किसी और की याद में तुम कैसे थे 

ये भी याद आ जाता हैं

Saturday, 30 August 2025

काफी कमाल के व्यक्ति हो

जब तक जीवन में कुछ पा नहीं लेते
ताने और गाली दोनों को अपना लेते हो

हर ताने का जवाब नहीं देना आता तुमको
मुस्कान की छाया में सबकुछ छुपा लेते हो

दूसरों को देख कर कभी सीख लेते हो चलना
और कभी कोई पहाड़ अपने आप ही उठा लेते हो

सच! काफी कमाल के व्यक्ति हो

कभी तेज धूप तुमको तपा भी नहीं पाती
और कभी छाया को भी अंधकार कह कर,
लंबी तान को सो जाते हो

अक्सर शाम को आलस्य और परिश्रम का मिश्रण,
अपनी भावना में डाल कर पी जाते हो
वाकई बड़े कमाल के व्यक्ति हो

सत्य सिर्फ जिताता या हराता नहीं हैं, ये डराता भी हैं 
जब दो सत्य आपस में टकरा जाते हैं
दूसरे वाले सच को भी थोड़ा सा अपना लेते हो
हम्म, इस
मुस्कान की आभा में तुम
काफी कुछ छुपा लेते हो

जीवन से रिश्ता कभी नहीं टूटा तुम्हारा
जबकि इसने तुम्हें जीतने से ज्यादा हराया हैं
जिस आईने को देखने से घबराता हैं औरों का दिल
उसी में अपना प्रतिबिंब देख कर,
अपनी कंघी से मांग बना लेते हो

वाकई काफी कमाल के व्यक्ति हो

सेल्फ़ी खींचने वाली सेल्फिश दुनिया
तुम्हें आगे बढ़ता देख नहीं पाती
जब कभी जीवन में कुछ पा लेते हो
कुछ लोगों को अनचाहे ही जला देते हो
तब छोड़ देते हैं लोग तुम्हारी ही महफ़िल में तुमको अकेला
बस किसी दर्द में डूबे को अपना दोस्त बना लेते हो

तुम बिना किसी को पीछे छोड़े
आगे बढ़ते ही जाते हो

तुम सह लेने का गुण जानते हो
अपने आप में काफी कमाल व्यक्ति हो

Tuesday, 19 August 2025

नहीं

 

नहीं, नज़र कभी न मिली हमारी,
मगर मैंने देखा है,
तुम्हें यह देखते हुए—
कि क्या मैं भी तुम्हें देख रहा हूँ?

 

कोई बात न की तुमने,
मगर मैंने सुना है,
तुम्हें चुपचाप सुनते हुए—
कि क्या मैं तुम्हें कुछ सुनाना चाहता हूँ?

 

मेरा ना होना शायद तुमने न महसूस किया,
मगर मैंने महसूस किया है,

तुम्हें महसूस करते हुए—
कि क्या मुझे तुम्हारे होने का एहसास है?

 

मुझे नहीं मालूम,
मेरे बारे में तुमने कभी सोचा है?
मगर मैंने सोचा हैं, तुम्हें ये सोचते हुए—
कि क्या तुम मेरे सोचे जाने के बारे में सोच रही हो?

 

नहीं, अब तक आवाज़ नहीं लगाई तुमने,
पर पूरी खामोशी में
मैंने तुम्हें रियाज़ करते पाया है,
एक दिन मेरा नाम पुकारने का।

Monday, 11 March 2024

कौन सी कविता लिखूँ

कौन सी कविता लिखूँ

वही जो तुम्हारे मिलने के ठीक पहले लिख रहा था
या वो जो तुम्हारे आ जाने के बाद लिखना भूल गया था


उसका क्या करू जिसे बस
लिखते - लिखते छोड़ दिया था

और वो जो मन में आई तो थी
पर जब कलम ले कर बैठा तब तक विलुप्त हो गयी थी

और वो वाली जो रात को दस्तक देने आई थी
लेकिन जबतक उसे सुन पाता
, वो जा चुकी थी

एक कविता ऐसी भी थी जो सुबह-सुबह सपने की तरह दिखी
पर आँख खुलते तक भूल गयी

याद हैं उसे कितनी देर तक याद किया था

इन सब अधूरी कविताओ को कभी पूरा नहीं किया
लेकिन तुम्हारे आने के बाद इनकी कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी

Monday, 20 March 2023

जानो या, ना जानो

 "जानना क्या होता है ?"

बिना किसी मुस्कान के उस मुस्कुराते हुए चहरे ने पुछा

"क्या? "मैंने कहा 

"यही की ये जानना आखिर होता क्या है "

सवाल सीधा था और उत्तर मेरे पास था

"जानना मतलब अनजान नहीं रहना" टपक से मेरा जवाब आया 

लेकिन संतुष्टि उसके चेहरे से नदारद थी, शायद उस मुस्कान की तरह 

"फिर खुद को जानना क्या होता है ?"

"खुद को ?" मैंने पुछा 

"हाँ मतलब ऐसा क्यों कहते है की खुद जो जानो"

"क्युकी,,," मैं सोच में पड़ गया 

"अपने बारे में सबसे पहले क्या जानना चाहिए"

हम्म, मेरे सोचने की शक्ति विलुप्त हो रही थी

"क्या पहले खामियाँ पहचाने या पहले खूबियों को टटोले ?"

ये तो पहेली हो गयी 

"या अपने स्वभाव का चित्र बनाये"

चित्र!, स्वभाव का चित्र ?

"लेकिन फिर सोचा की अपना चित्र कौन बनता है"

ये बात तो है, लेकिन 

"और इच्छाओ का क्या, क्या वो ही मुझको मैं नहीं बनाती?"

"सच पर और भी तो बहुत कुछ है जानने को" मैं बोल पड़ा 

"क्या"

"यही की पहले ये जानो की ,,, " सचमुच विलुप्त नहीं तो विलुप्ति की कगार पे तो आ ही गयी है मेरी सोच 

"पहले ये जानो की क्या जानना है फिर ये की कैसे जानना है, और फिर ये की यह सब जान की क्या करोगे!"

क्या मैं यह सब जान भूझ कर कर रहा हूँ?

"अच्छा मेरा काम पूरा हुआ, अब तुम,,,"

"अब मैं क्या " मैंने उस मुस्कुराते हुए चेहरे को देखा 

"अब तुम जानो!"

 

image credit: Mark Timberlake 

Wednesday, 1 December 2021

इस कविता का शीर्षक नहीं मिला

 


गली के मोड़ पर उसने उसको आखिरी बार देखा था 

खुद को वही छोड़ कर वह आगे बढ़ गया 

बहुत पहले उसने समझ लिया था, 

की सब को समझना उसकी समझ से परे हैं 


सब में वह खुद भी आता था 


उससे मिलने जब वह उसके शहर आया था 

आशा ऐसी थी की खुद से भी मुलकात हो जाएगी, 

बहुत पहले उसने समझ लिया था 

की अपनों को क्षमा करना कितना कठिन होता है 


क्षमादान वह खुद को भी नहीं दे पाया था 


समय से पहले पहुंचना उसका व्यक्तित्व नहीं था  

पर देर होने का डर उसके मिज़ाज़ पे हावी था 

बहुत पहले उसने समझ लिया था 

की ठंडी कॉफ़ी पीना अब उसकी आदत बन चुकी हैं 


और अपनी आदतों से वह खुद भी ऊब चूका हैं 


मुलाकात के अंत में दोनों उसी गली के कोने पर विदा हुए  

उसके जाने के बाद उसने अपने लौट आने की प्रतीक्षा की 

बहुत पहले उसने समझ लिया था, 

की खुद को पुकारने के लिए उसे किसी अनुवादक की ज़रुरत नहीं 


शायद खुद को मनाने के लिए, वह फिर एक बार इस मोड़ पर आए

वो मेरे स्कूल का लड़का था

वो मेरे स्कूल का लड़का था  बात ज्यादा नहीं करता था, लेकिन बोलता बहुत था  इतने दोस्त नहीं थे उसके  बस दो चार के साथ ही फ़िरता था  उसके नंबर बहु...