वर्क फ्रॉम होम करते करते मेरा मन तो घर में ही लग गया है
तुम्हारे दफ्तर वालो ने मगर तुमको ऑफिस में ही बुलाया हैं
जो पहले तुम घर होती थी, आज कल मैं होता हूँ
तुम ग्रहणी थी और अब मैं ग्रहण हो गया हूँ
लेकिन जब तुम आने को होती हो तब ये सोचता हूँ
थक कर जब तुम घर आओ ,और फिर किचन के काम में लगना न पड़े
जब मैं तुम्हारे घर आने से पहले सारे बर्तन धो डालता हूँ
और पतीले में चाय बना कर त्यार रखता हूँ
तुम चुपचाप चाय का कप उठाती हो
अपना मोबाइल चेक करते करते उसे ख़तम कर देती हो
फिर तुम अपना काम करने लग जाती हो
और मेरी तारीफ करना भूल जाती हो
जब कभी मैं तुम्हारे लिए पनीर बनता हूँ
तुम्हारे हिसाब से उसमे सारे मसाले मिलाता हूँ
हम कोई थ्रिलर मूवी देखते हुए उसे खाते है
उसके बाद बस सोने चले जाते है
रात को जब तुम सो रही होती हो
मुझे याद आता है तुम पनीर की तारीफ करना भूल गयी हो
सुबह सुबह कभी कभी जब मैं तुमसे पहले उठ जाता हूँ
और जैसे तैसे नाश्ता बना कर तुम्हारे लिए बेड पर लाता हूँ
तुम अपना व्हाट्स अप्प मेसेजस देखते हुए नाश्ता पूरा करती हो
और फिर अपनी दिन चर्या में लग जाती हो
तुम्हारे जाने के बाद मैं जब अपना नाश्ता करता हूँ
सोचता हूँ अगली बार तुम्हे मेरी तारीफ करना याद दिलाता हूँ
लेकिन उस दिन जब मैं तुम्हे याद दिलाने तुम्हारे पीछे आया
तो देखा की किचन की सफाई में लगी हो
चाय का पतीला हो या पनीर की कढ़ाई
तुम्ही उन्हें साफ़ करके ठीक जगह पर रख रही हो
उस दिन लगा की तारीफ की भूख में जो भी किया
उसने शायद तुम्हारा काम ही बढ़ा दिया
तुम अगले दिन फिर दफ्तर जाती हो
मेरे लिया दिन का खाना और अपने लिए टिफ़िन बनाती हो
तुम्हारे जाने के बाद जब मैं किचन देखता हूँ
मेरे लिए कोई काम छोड़ा हैं, ऐसा नहीं पाता हूँ
सही हैं, मेरी तारीफ के लिए तुम्हारे पास शब्द नहीं हैं
लेकिन मेरी तारीफ हो इसके लिए अभी सही वक़्त नहीं हैं
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