आज मुझसे मिलने अरसे बाद वो आया है
पहचानने में थोड़ी देर लगी मुझे,
और मुझको फिर ढूंढ लेने में उसे
हाल चाल पूछना हम दोनों ने ही ज़रूरी नहीं समझा
उसका अकेलापन भांपने में थोड़ी देर लगी मुझे,
और मेरी व्यस्तता समझने में उसे
देर तक हम दोनों चुप चाप बैठे रहे, पहले की ही तरह
उसकी ख़ामोशी सुनने में थोड़ी देर लगी मुझे
और मेरी नज़रो के पीछे देखने में उसे
हम दोनों कभी एक ही शक्श हुआ करते थे
मेरा व्यक्तित्व उसीकी सजगता भरी ख़ामोशी में बना था
और उसकी कल्पना मेरे भ्रमित न होने पे निर्भर थी
उसके चले जाने के बाद, बहुत देर तक कुछ ढूंढता रहा मै
शायद उसे भूलने में और देर नहीं लगेगी मुझे
और फिरसे मुझे याद करने में उसे
Photo by @sankla1 /photographer/sankla1-35591 Freeimages.com</a>

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