Wednesday, 26 May 2021

कुछ भूला हुआ

 उस दिन कुछ पुराने नंबर अपने मोबाइल से छांट रहा था 

कुछ नाम तो जाने पहचाने थे और कुछ को तो याद भी नहीं कर पा रहा था

पूरा मोबाइल छानने के बाद ये समझ आया की कितने ही साथी है पुराने जिन्हे भूले हुए भी कई बरस बीत गए है 



सभी लोगो से दुबारा संपर्क करना शायद संभव नहीं 

परन्तु उनसे जुडी यादो को फिरसे सहेजने का प्रयास कर सकते है 


उसी दिन पुराने फोटो एल्बम भी खंगालने लगा 

न जाने कौन सा भूला हुआ यादो का  खज़ाना हाथ लग जाये 

कई तस्वीरो को एक आरसे के बाद देखने के बाद हलकी हलकी मुस्कानो की एक झड़ी सी लग गयी 


इन सभी, कभी खो चुकी, तस्वीरो को घर की दीवारों पे लगाना तो मुमकिन नहीं

परन्तु जब भी खुद को फिरसे जानना हो तो इनको दुबारा देखा जा सकता है 


फिर बारी अपने चेतना के कुछ पूराने अध्यायो को पलटने की आयी 

उन पलो में खुदको या खुदमे उनको ढूंढने लगा, 

अपने मस्तिक्ष की इस काल्पनिक किताब को पढ़के जब लौटा तो महसूस हुआ की बहुत से पन्ने तो देखे हि नहीं 


अपने जीवन को फिरसे पूरा पढ़ पाना कठिन है, 

परन्तु फिरसे लिखने का प्रयास कर सकते है

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