Wednesday, 26 May 2021

स्कूल के दिनों की कोई बात जब किसी को सुनाता हूँ


उन दिनों कुछ नाम बाकियो से ज्यादा चर्चित हुआ करते थे 

जो सबसे लम्बा था उसका नाम ही आशु था

जो आज चलते हुए भी कभी कभी हॉफ जाता है

वो हम सब लोगो में सबसे तेज़ दौड़ा करता था


स्कूल के दिनों की कोई बात जब किसी को सुनाता हूँ

इन ही लोगो को अपने आस पास पाता हूँ


जिसने टेंथ में हिंदी में टॉप किया था

उसकी मातृभाषा ही बांग्ला थी

और जिसकी हैंडराइटिंग सबसे ज्यादा बुरी थी

उसी ने एस ऍम एस कॉलेज से डॉक्टरी की


स्कूल के दिनों की यह बात जब किसी को बताता हूँ

तब इन ही लोगो का नाम ले कर इतराता हूँ


जो एक पुरानी सी साइकिल पे स्कूल आया करता था

वह अब अपनी बाइक से हर महीने हिमालय के चक्कर काट कर आता है

तब जिस लड़के का वजन इतना था की उसे फूँक मार के उड़ा दिया करते थे

आज उसकी सिक्स पैक abs की पिक FB पे लाइक मारते है


अपने स्कूल के दिनों की ये बातें जब लोगो को बताता हूँ 

इन्ही बातों से उनको हंसाता हूँ


ज्यादातर लोगो के स्कूल का प्यार फेयरवेल से आगे नहीं पंहुचा

लेकिन कुछ थे जो अपनी तकदीर खुदा से लिखवा के लाये थे

कोई कोई ऐसा भी था जिसकी प्रेम कहानी स्कूल के हर क्लास में दर्ज थी

और कोई ऐसा भी था जिसका नाम तक लोगो को याद नहीं आज 


अपने स्कूल के दिनों की ये बातें जब लोगो को बताता हूँ 

इन्ही बातों से अपनी आखें भींगा जाता हूँ


जिसने हिस्ट्री की क्लास में टीचर से सात थप्पड़ खाये है

उसने अपना खुद का बिज़नेस करके पैसे खूब कमाए है

तबके सभी बैक बेंचेर आज मैनेजर बन चुके है

तब अपना होम वर्क नहीं कर पाते थे,

और आज पूरी टीम से करवाते है


अपने स्कूल के दिनों की ये बातें जब लोगो को बताता हूँ 

वो लोग ऐसे थे, यकीन नहीं कर पाता हूँ


प्रिंसिपल की दकियानूसी बातों पर, हम उनके मुँह पर ही हंस देते थे 

एक्स्ट्रा क्लास लगवा कर, हमे असेंबली से ही अलग करवा दिया गया था 

हफ्ते में आने वाले एक मात्र गेमस पीरियड की टीम एक दिन पहले ही बट जाय करती थी 

मैदान में हम वक़्त से पहले होते थे, लेकिन वापिस आते आते अगला पीरियड भी खत्म हो जाता था


अपने स्कूल के ये किस्से जब लोगो को बताता हूँ  

उन्हें भी अपने साथ मुस्कुराता हुआ पाता हूँ


साइंस और कॉमर्स ले कर भी जो कभी बट गए थे  

आज वो फर्क व्हाट्स अप्प के ग्रुप में नज़र नहीं आता   

जो कभी जिगरी दोस्त हुआ करते थे, वो दोस्त तो अब भी है मगर  

उनका जिगर अब सिर्फ अपने शरीर का खून साफ़ करने के काम आता है


वो पूछते है फिर मुझसे, क्या यही तुम्हारी हिस्ट्री है तो मैं कोई जवाब नहीं दे पाता, 

बस ये सोचता हूँ की हिस्ट्री तो तारीखों की मोहताज़ होती है

ये हमारी लाइफ का वो हिस्सा है जो अब किस्सों में सिमट गया है, 

ये हिस्सा तब तक ही है  ,जब तक वह लोग है और एक दूसरे को याद है


जिन दिनों की याद करते ही चहरे पे मुस्कान आ जाये 

वोही याद करके मै फिर किसी और टॉपिक पे आ जाता हूँ

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