Wednesday, 26 May 2021

वो मेरा पुराना मोहल्ला

 इतने सालो बाद जब मैं लौटा, तो काफी कुछ बदल गया था 

गली के मोड़ पे वो डेयरी की दूकान तो वही थी मगर

वहाँ बैठे लोगो में कोई पुराना चेहरा नही दिखा  

कोने में रखी स्टूल के निचे पड़ी एक पुरानी याद जरूर मिल गयी    


उस दिन भरी धुप में उसी पे बैठ के शायद आज के दिन का सपना देखा था 

तो इस बार उससे मिले बिना नहीं लौटने का निश्चय किया 


वहॉँ बैठ के चाय आर्डर की तो नज़र खूंटे से टंगे कैलेंडर पे गयी  

समय के पर्याय इस बहीखाते के कई सौ पन्ने उड़ गए थे  

और उडा ले गए थे वो उस मासूमियत को हमारे चेहरे से भी  

परन्तु उस पुराने समय में थोड़ी देर के लिए लौटो, तो हम सब काफी नए थे 


तब कुछ के नयी नयी मूछे आयी थी और कोई पहली बार शेव करके इतराया था      

सच, इस बार उससे बात किये बिना जाना ठीक नहीं 


चाय पीते पीते उस हिसाब की भी याद आयी जो कभी पूरा ही नहीं हुआ 

हममे से कोई न कोई ज़रूर होता था जो पैसे लाना हमेशा भूल जाता था

दुकानदार का चेहरा देखा तो वो दिन याद आया 

जब हम हम पैटीज़ खाने के बाद बिना पैसे दिए वहाँ से भाग गए थे 


उस बिजली के खम्बे पे भी नज़र गयी जिसका बल्ब हमारे उसके नीचे आते ही बुझ जाया करता था 

तो इस बार उसको देखे बिना कैसे यहाँ से जा सकता हूँ 


ये वही गली है जो रात के खाने के बाद टहलते वक्त हमारा बोझ उठाया करती थी 

और आज ये मेरे हलके हो गए कदमो को पहचानने के कोशिश कर रही है 

मौहल्ले का प्यार लेने ना तो कोई डॉक्टर आया ना इंजीनियर 

शायद हम सब ही कुछ न कुछ बनने के लिए इस गली को छोड़ के कही चले गए 


मेरा फ़ोन बजा, "हाँ बस अभी आता हूँ", यह कह कर मैंने एक बार मुड़कर देखा 

और इस बार भी सिर्फ उसको याद करके ही
निकल गया

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